अध्याय 463

कायलन

“मुझे अफ़सोस है कि मैंने तुम्हें मार्क किया…”

ये शब्द पूरी रात मेरे दिमाग़ में गूंजते रहे। मेरे साथ-साथ नींद में चले गए, सपनों में पीछा करते रहे, और आज सुबह जब मैं उठा… तो ये अब भी वहीं थे।

ये मुझे चिढ़ा रहे थे…

कल जो हुआ, वो नहीं होना चाहिए था।

मुझे इस बात का पछतावा नहीं था कि मैंने...

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